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पाइल्स बवासीर कारण व रोकने के उपाय

May 17, 2021 By Surendra Mahara 1 Comment

बवासीर (पाइल्स) कारण व रोकने के उपाय Bawaseer Piles Symptoms Causes Treatment In Hindi

Table of Contents

Bawaseer Piles Symptoms Causes Treatment In Hindi

बवासीर को हेमोराइड्स भी कहा जाता है जिसमें मलाशय के निचले भाग व गुदामार्ग में कुछ रक्त-वाहिकाओं, सहायक ऊतकों, पेशियों व इलास्टिक फ़ाइबर्स में सूजन आ जाती है। इसमें गुदा के आसपास कुछ पेशीय अथवा नस-नाड़ीगत जमाव अथवा शिरा-सम्बन्धी अड़चन जैसी अनुभूति होती है। उस भाग में रक्त जमने से उतना क्षेत्र कड़ा हो सकता है। प्रभावित भाग से रगड़ते हुए मलोत्सर्ग से मल में रक्त का अंश आ सकता है।

गुदीय मार्ग के दर्द के मारे पेट पर्याप्त साफ़ न हो पाने से व्यक्ति को अपनी आँतें भरी-भरी-सी लगती हैं। गुदा क्षेत्र लाल, खुजली युक्त व सूजन भरा स्पष्ट अनुभव हो सकता है, विशेष रूप से मलोत्सर्ग के दौरान गुदामार्ग की पीड़ा तेज व असहनीय-सी हो जाती है। समय पर ठीक न हो अथवा उपचार न कराया जाये तो पाइल्स से होकर अन्य गम्भीर समस्याएँ आ सकती हैं, जैसे कि अतिरेक रक्तस्राव जिससे एनीमिया आ सकता है.

Bawaseer Piles Symptoms Causes Treatment In Hindi

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Piles

मलमार्ग में घाव बने रहने से संक्रमण हो गया तो पूरा पाचन-पथ प्रभावित हो सकता है. स्थिति जस की तस बनी रही तो सम्भव है कि स्वतः मलोत्सर्ग होने लगे, अर्थात् मलोत्सर्जन पर नियन्त्रण न रह जाये. सूजन-संक्रमण इत्यादि स्थितियों से गुदा में प्रभावित शिराओं अथवा माँसपेशियों के बीच दरार पड़ सकती है जिसे फ़िशर कहा जाता है (वैसे फ़िशर अलग से व अपने आप भी हो सकता है ).

हेमोराइड में रक्त-आपूर्ति अपने आप रुक जाये तो ख़ून का थक्का जम सकता है अथवा संक्रमण घातक रूप ले सकता है। इसी प्रकार फ़िष्च्युला भी साथ में अथवा अलग से सम्भव है जिसमें गुदा मार्ग की त्वचा के समानान्तर एक नली-सी सँकरी संरचना बन जाती है।

बवासीर (पाइल्स) के प्रकार :

पाइल्स मूल रूप से दो प्रकार का होता है – बाहरी व आन्तरिक. बाहरी पाइल्स गुदा के बाहर एवं आन्तरिक पाइल्स गुदा के भीतर। इस प्रकार पाइल्स का आकार भी कम-अधिक हो सकता है।

बवासीर (पाइल्स) के कारण :

पाइल्स हो, फ़िशर अथवा फ़िष्च्युला किसी का भी सटीक कारण वैज्ञानिकों को पता नहीं चल पाया है, बस कुछ सम्भावित कारण गिनाये जाते हैं जो किसी न किसी प्रकार से पाइल्स फ़िशर फ़िष्च्युला से जुड़े पाये गये हैं :

*. लम्बे समय से चला आ रहा कब्ज़
*. बहुत समय से हो रहे दस्त
*. भारी वज़न उठाना
*. गर्भावस्था (कभी-कभी)
*. मलत्याग के समय तनाव ( जैसे कि पाश्चात्य शैली के शौचालय का प्रयोग अथवा बच्चों को डरा-धमकाकर मलत्याग के लिये विवश करना )
*. शौचालय में अनावष्यक बैठे रहने अथवा मोबाइल लेकर शौचालय जाने जैसी स्थितियों में पाइल्स के विकास की आषंका बलवती हो जाती है क्योंकि मलाशय के निचले हिस्से में अनावष्यक दबाव पड़ता है. ‘पेट अभी साफ़ नहीं हुआ’ सोचकर जबरन ज़ोर लगाने अथवा कार्यालय इत्यादि जाने की जल्दबाज़ी में झटके से मलोत्सर्ग से गुदा व मलाषय की रक्त-वाहिकाओं के खिंचने से वहाँ पाइल्स बनने की सम्भावना बढ़ती जाती है।

बवासीर (पाइल्स) जाँच व रोग से बचने के उपाय :

पेट व आँतरोग विशेषज्ञ के ही पास जायें जो गुदामार्ग में एक प्रकाश व कैमरा युक्त नली प्रवेश कराकर कम्प्यूटर-मानिटर पर गुदा व मलाशय की आन्तरिक स्थितियों को निकटता से देखेगा ( उस पर ज़ोर डालें कि सर्वप्रथम वह यह जाँच कर ही ले, फिर आगे की बात करे )। हो सकता है कि वह आपको गुनगुने पानी के टब में बैठने की सलाह दे अथवा गुदाद्वार में एक लोशन लगाने को दे.

स्थिति की गम्भीरता के अनुसार वह आपको दर्द निवारक, प्रति जैविक इत्यादि सुझा सकता है ( चिकित्सक से पूछे बिना जिनका सेवन नहीं करना है) एवं अधिक गम्भीर स्थिति होने पर शल्यचिकित्सा ही एकमात्र विकल्प बची रह जाती है जिसमें अधिकांषतया कुछ मिनट्स बाद व्यक्ति घर जा सकता है। वैसे अधिकांश प्रकरण गम्भीर होने से पहले ही रोके जा सकते हैं.

पाइल्स से बचने के कुछ सहज उपाय :

1. मनमर्ज़ी अथवा सुविधा के अनुसार के बजाय नित्य सुबह उठकर तुरंत शौचालय जाने की आदत बनायें ताकि पेट नियमित साफ़ होता रहे.

2. खाने में पानी व रेशो (जैसे सलाद, फलीदार खाद्य, कंद-प्रकन्द व कच्चे पदार्थों) की मात्राएँ बढ़ायें तथा प्रोसेस्ड फ़ूड के बजाय चोकर युक्त आटे व मोटे अनाजों का सेवन किया करें.

3. खाने के आसपास अथवा खाली पेट अथवा सोके उठते से ही चाय-काफ़ी की आदत हो तो इसे मिटायें. चाय-काफ़ी व मद्य वैसे भी कब्ज़ एवं फिर पाइल्स के कारण पाये जाते रहे हैं.

4. शारीरिक भार अधिक हो तो शारीरिक सक्रियता बढ़ाते हुए उसे घटायें.

5. ईसबगोल की भूसी, त्रिफला जैसे घरेलु नुस्खे यदि कभी-कभी व सीमित मात्रा में आज़मायें तो सहायक हो सकते हैं परन्तु इन पर निर्भर होने से स्वयं को रोकें.

6. कुर्सी, विषेषतया नर्म आसनों पर बैठने की आदत को दूर करें, थोड़ी-थोड़ी देर में चलते-फिरते रहा करें.

7. मलवेग लगने पर रोकें नहीं, शीघ्र पेट साफ़ कर आयें.

8. गुदामार्ग को साफ़ रखें, शौच के उपरान्त उसे बहते जल से साफ कर सकते हैं परन्तु हाथ अथवा किसी भी वस्तु से रगड़ें नहीं.

9. भारतीय शैली के शौचालय का प्रयोग करें.

पाइल्स-सम्बन्धी कुछ भ्रांतियाँ एवं निदान :

भ्रांति – गुड़ इत्यादि खाने से बवासीर हो जाता है !

निदान – वास्तव में ऐसा कुछ नहीं होता। समस्त शाकाहारी खाद्यों में कुछ-न-कुछ विशेष होता है, वास्तव में गुड़ तो लौह की खान है जो एनीमिया दूर रखता है एवं रक्त को पोषकों से समृद्ध बनाता है।

भ्रांति – शल्यक्रिया करवाने के बाद भी पाइल्स पुनः हो जाता है !

निदान – ऐसे होने को तो कुछ भी हो सकता है, वास्तव में स्थिति गम्भीर हो अथवा महीनों से पाइल्स अथवा ऐसी कोई समस्या पनप रही हो तो शल्यक्रिया स्थिति को सामान्य करने व शरीर के अन्य अंगों को बचाने के लिये आवश्यक हो जाती है. जहाँ तक पाइल्स के पुनः हो जाने वाली बात है तो रोग कोई भी हो, शल्यक्रिया अथवा औषधि कैसी भी हो कौन-सा चिकित्सक उस रोग के पुनः न होने को आशवस्त कर सकता है ?

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Comments

  1. NikitaTimes says

    June 2, 2021 at 5:32 pm

    बेहतरीन पोस्ट के लिए शुक्रिया. बहुत ही बढ़िया जानकारी दी गयी है .

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